Thursday, January 22, 2026

नेताजी सुभाष चंद्र बोस जयंती  23 जनवरी




र साल 23 जनवरी को भारत के प्रमुख स्वतंत्रता सेनानियों में से एक सुभाष चंद्र बोस की जयंती के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। इस दिन को पराक्रम दिवस के रूप में मनाया जाता है।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस  भारत के महान स्वतंत्रता सेनानी थे, जिनका जन्म 23 जनवरी, 1897 को कटक (ओडिशा) में हुआ, जिन्होंने भारतीय सिविल सेवा छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया; गांधीजी से प्रभावित होकर कांग्रेस में शामिल हुए, लेकिन बाद में मतभेद होने पर जर्मनी और जापान की मदद से 'आज़ाद हिंद फ़ौज' (INA) बनाकर 'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा' का नारा दिया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1945 में एक विमान दुर्घटना में लापता हो गए, और उनकी मृत्यु का रहस्य आज भी अनसुलझा है, हालांकि उन्हें 'नेताजी' कहा जाता था और उन्होंने 'जय हिंद' का नारा दिया।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा:
जन्म: 23 जनवरी, 1897 को कटक (ओडिशा) में एक संपन्न बंगाली परिवार में हुआ।
शिक्षा: कलकत्ता से दर्शनशास्त्र में डिग्री ली और आईसीएस (ICS) परीक्षा पास की, लेकिन ब्रिटिश सेवा ठुकरा दी।
प्रेरणा: स्वामी विवेकानंद के विचारों और राष्ट्रवाद से गहरे प्रभावित थे।
स्वतंत्रता संग्राम में भूमिका:
कांग्रेस में प्रवेश: 1921 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से जुड़े, गांधीजी से मिले और उनके सुझाव पर स्वतंत्रता आंदोलन में सक्रिय हुए।
"तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हें आजादी दूंगा": म्यांमार (बर्मा) में यह ऐतिहासिक नारा दिया और 'दिल्ली चलो' का आह्वान किया।
'आज़ाद हिंद फ़ौज' (INA): जापान और जर्मनी की मदद से 'आज़ाद हिंद फ़ौज' का गठन किया और सिंगापुर में 'आज़ाद हिंद सरकार' (Provisional Government of Free India) की स्थापना की, जिसे कई देशों ने मान्यता दी।
'नेताजी' का रहस्य और अंतिम दिन:
पलायन: ब्रिटिश कैद से बचने के लिए पठान के वेश में देश से भागे और अफगानिस्तान होते हुए जर्मनी पहुँचे।
'नेताजी' की उपाधि: उन्हें जर्मनी और जापान में भारतीय सैनिकों ने 'नेताजी' कहा।
विमान दुर्घटना: 18 अगस्त, 1945 को ताइपेई (ताइवान) में एक विमान दुर्घटना के बाद लापता हो गए, जहाँ उनकी मृत्यु मानी जाती है।
रहस्य: उनकी मृत्यु आज भी एक रहस्य बनी हुई है|
विरासत:
उन्होंने 'जय हिंद' का नारा गढ़ा, जो आज भी भारत का राष्ट्रीय अभिवादन है।
उनकी जयंती (23 जनवरी) को भारत में 'पराक्रम दिवस' के रूप में मनाया जाता है।

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